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mahabharat 9.25.28: वे चारों ओर से पर्वताकार हाथियों से घिरे हुए थे। वे तीखे बाणों द्वारा उस हाथी सेना से युद्ध करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  9.25.28 
तै: समन्तात् परिवृत: कुञ्जरै: पर्वतोपमै:।
नाराचैर्विमलैस्तीक्ष्णैर्गजानीकमयोधयत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वे चारों ओर से पर्वताकार हाथियों से घिरे हुए थे। वे तीखे बाणों द्वारा उस हाथी सेना से युद्ध करने लगे।
 
They were surrounded by mountain-like elephants from all sides. They began to fight with that elephant army with sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)