Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.25.2: जैसे बादल जल की धारा बरसाते हैं, उसी प्रकार वे बाणों की वर्षा करते हुए दिखाई दे रहे थे। उन बाणों का स्पर्श इन्द्र के वज्र के समान कठोर था। वे बाण असह्य और अत्यंत शक्तिशाली थे॥2॥ | mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्राशनिसमस्पर्शानविषह्यान् महौजस:।
विसृजन् दृश्यते बाणान् धारा मुञ्चन्निवाम्बुद:॥ २॥
अनुवाद
जैसे बादल जल की धारा बरसाते हैं, उसी प्रकार वे बाणों की वर्षा करते हुए दिखाई दे रहे थे। उन बाणों का स्पर्श इन्द्र के वज्र के समान कठोर था। वे बाण असह्य और अत्यंत शक्तिशाली थे॥2॥
Just as a cloud pours down a torrent of water, in the same way they were seen raining arrows. The touch of those arrows was as hard as Indra's thunderbolt. Those arrows were unbearable and extremely powerful.॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥