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mahabharat 9.25.18-19h: नरेश्वर! भरतनन्दन! उस समय आपके पुत्र ने आक्रमणकारी धृष्टद्युम्न पर अनेक बाणों से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  9.25.18-19h 
ततस्त्वापततस्तस्य तव पुत्रो जनाधिप॥ १८॥
बाणसंघाननेकान् वै प्रेषयामास भारत।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! भरतनन्दन! उस समय आपके पुत्र ने आक्रमणकारी धृष्टद्युम्न पर अनेक बाणों से आक्रमण किया।
 
Nareshwar! Bharatnandan! At that time your son attacked the attacking Dhrishtadyumna with many arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)