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श्लोक 9.25.15-16h  |
आगम्य सहसा केचिद् रथै: स्वर्णविभूषितै:॥ १५॥
पाण्डवानामनीकेषु धृष्टद्युम्नमयोधयन्। |
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| अनुवाद |
| कुछ लोग अचानक अपने स्वर्ण-जटित रथों पर सवार होकर आये और पाण्डव सेनाओं में से धृष्टद्युम्न के साथ युद्ध करने लगे। |
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| Some people suddenly arrived in their gold-decorated chariots and started fighting with Dhrishtadyumna in the Pandava armies. |
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