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mahabharat 9.25.14-15h: वे वीर कौरव सैनिक अपने रथों पर सवार तथा किंकिणी समूह से सुशोभित होकर तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने के लिए तत्पर राक्षसों और दानवों के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  9.25.14-15h 
ते शूरा: किङ्किणीजालै: समाच्छन्ना बभासिरे॥ १४॥
त्रैलोक्यविजये युक्ता यथा दैतेयदानवा:।
 
 
अनुवाद
वे वीर कौरव सैनिक अपने रथों पर सवार तथा किंकिणी समूह से सुशोभित होकर तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने के लिए तत्पर राक्षसों और दानवों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Those valiant Kaurava soldiers, riding in their chariots and adorned with a group of kinkinis, looked like demons and devils, ready to conquer the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)