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mahabharat 9.25.11-13h: हे भरतश्रेष्ठ! कुछ लोग स्वयं जल पीते और घोड़ों की थकान दूर करते। तत्पश्चात वे कवच धारण कर युद्ध के लिए निकल पड़ते। अनेक अन्य सैनिक अपने घायल भाइयों, पुत्रों और पिताओं को आश्वस्त कर शिविर में ले आते। तत्पश्चात वे युद्ध पर ध्यान केंद्रित करते। 11-12 1/2।   |   mahabharat अध्याय 9.25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 11-13h
 
 
श्लोक  9.25.11-13h 
पानीयमपरे पीत्वा पर्याश्वास्य च वाहनम्॥ ११॥
वर्माणि च समारोप्य केचिद् भरतसत्तम।
समाश्वास्यापरे भ्रातॄन् निक्षिप्य शिबिरेऽपि च॥ १२॥
पुत्रानन्ये पितॄनन्ये पुनर्युद्धमरोचयन्।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! कुछ लोग स्वयं जल पीते और घोड़ों की थकान दूर करते। तत्पश्चात वे कवच धारण कर युद्ध के लिए निकल पड़ते। अनेक अन्य सैनिक अपने घायल भाइयों, पुत्रों और पिताओं को आश्वस्त कर शिविर में ले आते। तत्पश्चात वे युद्ध पर ध्यान केंद्रित करते। 11-12 1/2।
 
O best of the Bharatas! Others would drink water themselves and relieve the tiredness of the horses. After that they would wear armour and go to fight. Many other soldiers would assure their wounded brothers, sons and fathers and bring them to the camp. After that they would concentrate on the war. 11-12 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)