श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  9.25.10-11h 
तानपास्य गता: केचित् पुनरेव युयुत्सव:॥ १०॥
कुर्वन्तस्तव पुत्रस्य शासनं युद्धदुर्मदा:।
 
 
अनुवाद
युद्ध के लिए उत्सुक बहुत से योद्धा युद्धभूमि में उन्मत्त होकर लड़ते हुए अपने घायल सैनिकों को ज्यों का त्यों छोड़कर आपके पुत्र की आज्ञा मानकर पुनः युद्ध के लिए चले जाते थे॥10 1/2॥
 
Many warriors eager for war, fighting madly on the battlefield, would leave their wounded soldiers as they were and, obeying your son's command, would again go for the battle.॥ 10 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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