श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 25: अर्जुन और भीमसेनद्वारा कौरवोंकी रथसेना एवं गजसेनाका संहार, अश्वत्थामा आदिके द्वारा दुर्योधनकी खोज, कौरवसेनाका पलायन तथा सात्यकिद्वारा संजयका पकड़ा जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.25.1 
संजय उवाच
पश्यतां यतमानानां शूराणामनिवर्तिनाम्।
संकल्पमकरोन्मोघं गाण्डीवेन धनंजय:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! यद्यपि कौरव योद्धा वीर योद्धा थे, जो युद्ध से कभी पीछे नहीं हटते थे और विजय प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे थे, फिर भी उनकी आँखों के सामने ही अर्जुन ने अपने गाण्डीव धनुष से उनके संकल्प को निष्फल कर दिया।"
 
Sanjaya said, "O King! Although the Kaurava warriors were valiant warriors who never backed down from the battle and were making every effort to achieve victory, yet in front of their very eyes Arjuna made their resolve futile with his Gandiva bow."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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