श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  9.24.60 
सर्वमासीज्जगत‍् पूर्णं पार्थनामाङ्कितै: शरै:।
रुक्मपुङ्खैस्तैलधौतै: कर्मारपरिमार्जितै:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सारा जगत् अर्जुन नाम से अंकित, तेल से धुले हुए तथा शिल्पियों द्वारा स्वच्छ किये हुए, स्वर्ण पंखयुक्त बाणों से व्याप्त हो रहा था।
 
The entire world there was being permeated by golden-feathered arrows inscribed with the name of Arjuna, washed with oil and cleaned by craftsmen. 60.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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