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श्लोक 9.24.50  |
क्षेममद्य करिष्यामि धर्मराजस्य माधव।
हत्वैतद् दुर्बलं सैन्यं धार्तराष्ट्रस्य पश्यत:॥ ५०॥ |
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| अनुवाद |
| माधव! आज मैं दुर्योधन के सामने इस दुर्बल सेना का नाश करके धर्मराज का कल्याण करूँगा। ॥50॥ |
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| Madhava! Today I will destroy this weak army in front of Duryodhan and do good to Dharmaraja.' ॥ 50॥ |
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