एवं पश्यामि वार्ष्णेय चिन्तयन् प्रज्ञया स्वया।
विदुरस्य च वाक्येन चेष्टया च दुरात्मन:॥ ४८॥
अनुवाद
‘वृष्णिनन्दन! मैं अपनी बुद्धि से विचार करके, विदुरजी के वचनों से तथा दुष्टात्मा दुर्योधन के प्रयत्नों से भी ऐसा ही घटित होता हुआ देखता हूँ ॥48॥
‘Vrishninandan! I see the same thing happening after thinking through my intelligence, Vidurji's words and the efforts of the evil soul Duryodhana. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥