श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  9.24.38-39 
नैष दास्यति नो राज्यमिति मे मतिरच्युत॥ ३८॥
उक्तोऽहं बहुशस्तात विदुरेण महात्मना।
न जीवन् दास्यते भागं धार्तराष्ट्रस्तु मानद॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
अच्युत! मुझे लगता है, अब भी वह हमें अपना राज्य नहीं देगा। पिताजी! महात्मा विदुर ने मुझसे कई बार कहा है कि 'हे पूज्य! दुर्योधन जब तक जीवित रहेगा, हमारा राज्य नहीं लौटाएगा।' 38-39.
 
‘Achyuta! I think, even now he will not give us his kingdom. Father! Mahatma Vidur has told me many times that ‘Honourable! Duryodhan will not return our share of the kingdom as long as he is alive.' 38-39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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