श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.24.33 
गुणतोऽभ्यधिकान् ज्ञात्वा बलत: शौर्यतोऽपि वा।
अमूढ: को नु युद्धॺेत जानन् प्राज्ञो हिताहितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष दूसरों को गुण, बल और पराक्रम में अपने से बड़ा जानकर मूर्खता से रहित और अपने भले-बुरे को समझने वाला बुद्धिमान होगा, वह उनसे युद्ध करेगा॥ 33॥
 
Knowing that others are greater than himself in virtue, strength or valour, who will be such an intelligent man who is devoid of foolishness and understands his own good and bad? He will fight with them.॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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