श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  9.24.21 
उक्तं भीष्मेण यद् वाक्यं हितं तथ्यं च माधव।
तच्चापि नासौ कृतवान् वीतबुद्धि: सुयोधन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मधुकुलभूषण! भीष्मजी द्वारा दी गई सच्ची और हितकारी सलाह भी उस मूर्ख दुर्योधन ने स्वीकार नहीं की।
 
Madhukulbhushan! Even the true and beneficial advice given by Bhishmaji was not accepted by that foolish Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)