स यात्वा वाहिनीं तूर्णमब्रवीत् त्वरयन् युधि।
युद्धॺध्वमिति संहृष्टा: पुन: पुनररिंदमा:॥ २॥
अपृच्छत् क्षत्रियांस्तत्र क्व नु राजा महाबल:।
अनुवाद
वे तुरन्त कौरव सेना में पहुँचे और सबको युद्ध के लिए शीघ्रता करने की प्रेरणा देकर बोले, ‘हे शत्रुओं का दमन करने वाले वीरों! हर्ष और उत्साह से युद्ध करो।’ ऐसा कहकर उन्होंने वहाँ उपस्थित क्षत्रियों से बार-बार पूछा, ‘महान् राजा दुर्योधन कहाँ है?’॥ 2 1/2॥
He immediately reached the Kaurava army and inspired everyone to hurry up for the battle and said, 'O heroes who are suppressing the enemies! Fight with joy and enthusiasm.' Having said this, he repeatedly asked the Kshatriyas there, 'Where is the mighty King Duryodhana?'॥ 2 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥