श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  9.24.16-17 
चोदयाश्वानसम्भ्रान्त: प्रविशैतद् बलार्णवम्।
अन्तमद्य गमिष्यामि शत्रूणां निशितै: शरै:॥ १६॥
अष्टादश दिनान्यद्य युद्धस्यास्य जनार्दन।
वर्तमानस्य महत: समासाद्य परस्परम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! आप प्रसन्नचित्त होकर इन घोड़ों को हाँककर इस युद्ध-समुद्र में उतरें। आज मैं अपने तीखे बाणों से शत्रुओं का नाश करूँगा। इस महायुद्ध को प्रारम्भ हुए अठारह दिन हो चुके हैं।'
 
‘Janardan! You should be in good spirits and drive these horses and enter this sea of ​​war. Today I will destroy the enemies with my sharp arrows. It has been eighteen days since this great war started.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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