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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार
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श्लोक 14
श्लोक
9.24.14
ततो ज्यातलनिर्घोष: पुनरासीद् विशाम्पते।
प्रादुरासीच्छराणां च सुमुक्तानां सुदारुण:॥ १४॥
अनुवाद
हे प्रजानाथ! तत्पश्चात् धनुष की प्रत्यंचा की टंकार और छोड़े हुए बाणों की भयंकर सीटी की ध्वनि पुनः सुनाई देने लगी ॥14॥
O Prajanath! Thereafter the twirling of the bowstring and the terrifying whistling sound of well-shot arrows began to be heard again. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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