श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  9.24.13 
सर्वे विवृततूणीरा: प्रगृहीतशरासना:।
शरासनानि धुन्वाना: सिंहनादान् प्रणेदिरे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सबके तरकश खुल गए, सबने अपने-अपने हाथों में धनुष ले लिए और सब लोग धनुष हिलाते हुए जोर-जोर से गर्जना करने लगे।13.
 
Everyone's quivers were opened, everyone took bows in their hands and everyone began to roar loudly while shaking the bows. 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)