श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  9.24.11 
हते तस्मिन् रथानीके पाण्डवेनाभिपालिते।
गजानेतान् हनिष्याम: पदातींश्चेतरांस्तथा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर द्वारा रक्षित इस रथसेना के नष्ट हो जाने पर हम इन हाथीसवारों, पैदलों और घुड़सवारों का भी संहार करेंगे। ॥11॥
 
"After this chariot army protected by Pandu's son Yudhishthira is destroyed, we will also kill these elephant riders, infantry and horse riders." ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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