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mahabharat 9.23.92: हे भरतश्रेष्ठ! भालों, तलवारों और बाणों से भरे हुए उस अत्यन्त भयंकर युद्धस्थल में ऐसा अधर्मपूर्ण युद्ध चल रहा था।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  9.23.92 
एवमासीदमर्यादं युद्धं भरतसत्तम।
प्रासासिबाणकलिले वर्तमाने सुदारुणे॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! भालों, तलवारों और बाणों से भरे हुए उस अत्यन्त भयंकर युद्धस्थल में ऐसा अधर्मपूर्ण युद्ध चल रहा था।
 
O best of the Bharatas! In that extremely dreadful battlefield filled with spears, swords and arrows, such a lawless battle was going on.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि संकुलयुद्धे त्रयोविंशोऽध्याय:॥ २३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें संकुलयुद्धविषयक तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)