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mahabharat 9.23.91: इस प्रकार उस महायुद्ध में प्रत्येक योद्धा दूसरे पर विजय पाने के लिए प्रयत्नशील होकर पिता, भाई, मित्र और पुत्रों का भी वध करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  9.23.91 
एवमन्योन्यमायत्ता योधा जघ्नुर्महाहवे।
पितॄन् भ्रातॄन् वयस्यांश्च पुत्रानपि तथा परे॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उस महायुद्ध में प्रत्येक योद्धा दूसरे पर विजय पाने के लिए प्रयत्नशील होकर पिता, भाई, मित्र और पुत्रों का भी वध करने लगा।
 
In this manner, in that great war, each warrior, striving to gain victory over another, began killing fathers, brothers, friends and even sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)