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mahabharat 9.23.84: हे मनुष्यों के स्वामी! फिर ऐसे बहुत से ताबूत ऊपर उठते हुए दिखाई देने लगे और प्रायः सभी योद्धा रक्त की गंध से मोहित हो गए।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  9.23.84 
तथोत्थितेषु बहुषु कबन्धेषु नराधिप।
तथा रुधिरगन्धेन योधा: कश्मलमाविशन्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! फिर ऐसे बहुत से ताबूत ऊपर उठते हुए दिखाई देने लगे और प्रायः सभी योद्धा रक्त की गंध से मोहित हो गए।
 
O lord of men! Then many such coffins began to be seen rising up and almost all the warriors were mesmerized by the smell of blood. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)