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mahabharat 9.23.69-70: हे प्रजानाथ! कवच, भुजा और जंघाओं से रहित तथा शस्त्रों से युक्त शरीरों के भूमि पर गिरने का शब्द अत्यन्त भयानक और रोमांचकारी था।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 69-70
 
 
श्लोक  9.23.69-70 
विमुक्तानां शरीराणां छिन्नानां पततां भुवि॥ ६९॥
सायुधानां च बाहूनामूरूणां च विशाम्पते।
आसीत् कटकटाशब्द: सुमहाँल्लोमहर्षण:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! कवच, भुजा और जंघाओं से रहित तथा शस्त्रों से युक्त शरीरों के भूमि पर गिरने का शब्द अत्यन्त भयानक और रोमांचकारी था।
 
O Prajanath! The sound of the torn apart bodies without armor, arms and thighs with weapons falling on the ground was extremely terrifying and thrilling.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)