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mahabharat 9.23.68-69h: उस भीषण युद्ध में जब तलवारों से कटे हुए सिर भूमि पर गिरते थे, तो उनसे ताड़ के फलों के गिरने के समान ठक-ठक की ध्वनि उत्पन्न होती थी।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 68-69h
 
 
श्लोक  9.23.68-69h 
असिभिश्छिद्यमानानां शिरसां लोकसंक्षये॥ ६८॥
प्रादुरासीन्महान् शब्दस्तालानां पततामिव।
 
 
अनुवाद
उस भीषण युद्ध में जब तलवारों से कटे हुए सिर भूमि पर गिरते थे, तो उनसे ताड़ के फलों के गिरने के समान ठक-ठक की ध्वनि उत्पन्न होती थी।
 
In that deadly war, when the heads being cut off by swords fell on the ground, they produced a thudding sound like that of falling palm fruits. 68 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)