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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  9.23.65-66h 
ततस्तेषु प्रयातेषु शकुनि: सौबल: पुन:॥ ६५॥
पार्श्वतोऽभ्यहनत् क्रुद्धो धृष्टद्युम्नस्य वाहिनीम्।
 
 
अनुवाद
उन सबके चले जाने पर सुबलपुत्र शकुनि पुनः क्रोधित हो गया और उसने बगल से आकर धृष्टद्युम्न की सेना का संहार करना आरम्भ कर दिया।
 
After they all left, Shakuni, son of Subala, became enraged again and came from the side and started killing Dhrishtadyumna's army. 65 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)