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mahabharat 9.23.61-63h: यहाँ तो रथों से भी युद्ध नहीं हो सकता। फिर बड़े-बड़े हाथियों का क्या? रथों का सामना रथों से और हाथियों का सामना हाथियों से होना चाहिए। शकुनि भागकर अपनी सेना में चला गया। अब राजा शकुनि फिर कभी युद्ध में नहीं आएगा।॥61-62 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 61-63h
 
 
श्लोक  9.23.61-63h 
न हि शक्यं रथैर्योद्धुं कुत एवं महागजै:॥ ६१॥
रथानेव रथा यान्तु कुञ्जरा: कुञ्जरानपि।
प्रतियातो हि शकुनि: स्वमनीकमवस्थित:॥ ६२॥
न पुन: सौबलो राजा युद्धमभ्यागमिष्यति।
 
 
अनुवाद
यहाँ तो रथों से भी युद्ध नहीं हो सकता। फिर बड़े-बड़े हाथियों का क्या? रथों का सामना रथों से और हाथियों का सामना हाथियों से होना चाहिए। शकुनि भागकर अपनी सेना में चला गया। अब राजा शकुनि फिर कभी युद्ध में नहीं आएगा।॥61-62 1/2॥
 
‘War cannot be fought here even with chariots. Then what about big elephants? Chariots should go to face chariots and elephants should go to face elephants. Shakuni ran away and went to his army. Now King Shakuni will not come to the war again.’॥ 61-62 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)