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mahabharat 9.23.56: घोड़ों और उनके सवारों की लाशों से ढकी धरती पर घोड़े पर सवार होकर दूर तक यात्रा करना किसी के लिए भी असंभव हो गया था।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  9.23.56 
दूरं न शक्यं तत्रासीद् गन्तुमश्वेन केनचित्।
साश्वारोहैर्हतैरश्वैरावृते वसुधातले॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
घोड़ों और उनके सवारों की लाशों से ढकी धरती पर घोड़े पर सवार होकर दूर तक यात्रा करना किसी के लिए भी असंभव हो गया था।
 
It had become impossible for anyone to travel far on horseback on the ground covered with the corpses of horses and their riders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)