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mahabharat 9.23.54: बहुत से लोग जो विजय की इच्छा रखते थे और स्वयं को बहादुर समझते थे, पृथ्वी पर सर्वत्र पड़े हुए दिखाई दे रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  9.23.54 
भूमौ निपतिताश्चान्ये बहवो विजयैषिण:।
तत्र तत्र व्यदृश्यन्त पुरुषा: शूरमानिन:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
बहुत से लोग जो विजय की इच्छा रखते थे और स्वयं को बहादुर समझते थे, पृथ्वी पर सर्वत्र पड़े हुए दिखाई दे रहे थे।
 
Many men who desired victory and considered themselves brave were seen lying everywhere on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)