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mahabharat 9.23.47: हे भरतराज! उस समय सब ओर से गिरते हुए बाण आकाश को छाने वाले टिड्डियों के दल के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  9.23.47 
प्रासानां पततां राजन् रूपमासीत् समन्तत:।
शलभानामिवाकाशे तदा भरतसत्तम॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतराज! उस समय सब ओर से गिरते हुए बाण आकाश को छाने वाले टिड्डियों के दल के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
O King of the Bharata clan! At that time the arrows falling from all sides appeared like swarms of locusts covering the sky. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)