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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  9.23.46 
ऋष्टिभिर्विमलाभिश्च तत्र तत्र विशाम्पते।
सम्पतन्तीभिराकाशमावृतं बह्वशोभत॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! वहाँ हो रही शुद्ध वर्षा से भरा हुआ आकाश बहुत सुन्दर लग रहा था।
 
O Prajanath! The sky filled with the pure rain falling there was looking very beautiful. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)