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mahabharat 9.23.40: महाराज! उधर विजय की इच्छा रखने वाला महाबली सुबलपुत्र शकुनि पाण्डवों की सेना पर पीछे से आक्रमण कर रहा था।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  9.23.40 
ततस्तु सौबलो राजन्नभ्यतिक्रम्य पाण्डवान्।
जघान पृष्ठत: सेनां जयगृद्ध: प्रतापवान्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उधर विजय की इच्छा रखने वाला महाबली सुबलपुत्र शकुनि पाण्डवों की सेना पर पीछे से आक्रमण कर रहा था।
 
King! On the other side, the mighty Subala's son Shakuni, who desired victory, was attacking the Pandava's army from the rear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)