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mahabharat 9.23.38-39: तत्पश्चात् धर्मराज की आज्ञा से सात सौ हाथी, धनुषधारी सवार, पाँच हजार घुड़सवार, वीर सहदेव, तीन हजार पैदल सैनिक तथा द्रौपदी के सभी पुत्र - ये सब युद्धभूमि में युद्धोन्मादी शकुनि पर टूट पड़े।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  9.23.38-39 
ततो गजा: सप्तशताश्चापपाणिभिरास्थिता:।
पञ्च चाश्वसहस्राणि सहदेवश्च वीर्यवान्॥ ३८॥
पादाताश्च त्रिसाहस्रा द्रौपदेयाश्च सर्वश:।
रणे ह्यभ्यद्रवंस्ते तु शकुनिं युद्धदुर्मदम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्मराज की आज्ञा से सात सौ हाथी, धनुषधारी सवार, पाँच हजार घुड़सवार, वीर सहदेव, तीन हजार पैदल सैनिक तथा द्रौपदी के सभी पुत्र - ये सब युद्धभूमि में युद्धोन्मादी शकुनि पर टूट पड़े।
 
Thereafter, as per the orders of Dharmaraja, seven hundred elephants with riders seated with bows in their hands, five thousand horsemen, the valiant Sahadeva, three thousand foot soldiers and all the sons of Draupadi - all of them attacked the war-mongering Shakuni on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)