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mahabharat 9.23.35: फिर उन्होंने कहा, 'पाण्डुपुत्र! वह सुबलपुत्र शकुनि कवच पहनकर आया है और हमारी सेना के पिछले भाग को कष्ट दे रहा है तथा उसके सब सैनिकों को मार रहा है; इस मूर्ख को तो देखो।'   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  9.23.35 
असौ सुबलपुत्रो नो जघनं पीडॺ दंशित:।
सैन्यानि सूदयत्येष पश्य पाण्डव दुर्मतिम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने कहा, 'पाण्डुपुत्र! वह सुबलपुत्र शकुनि कवच पहनकर आया है और हमारी सेना के पिछले भाग को कष्ट दे रहा है तथा उसके सब सैनिकों को मार रहा है; इस मूर्ख को तो देखो।'
 
Then he said, 'Son of Pandu! That son of Subala, Shakuni, who has come wearing armour, is troubling the rear of our army and killing all its soldiers; just look at this fool.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)