Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.23.33: महाराज! जिस प्रकार वायु के वेग से बादलों का समूह सब ओर से बिखर जाता है, उसी प्रकार इस आक्रमण से पाण्डवों की विशाल सेना का स्वरूप नष्ट हो गया।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.23.33 
तदभ्रमिव वातेन क्षिप्यमाणं समन्तत:।
अभज्यत महाराज पाण्डूनां सुमहद् बलम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जिस प्रकार वायु के वेग से बादलों का समूह सब ओर से बिखर जाता है, उसी प्रकार इस आक्रमण से पाण्डवों की विशाल सेना का स्वरूप नष्ट हो गया।
 
Maharaj! Just as a group of clouds gets scattered from all sides due to the force of the wind, in the same way the formation of the huge army of the Pandavas got destroyed due to this attack.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)