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mahabharat 9.23.31-32: हे भरतश्रेष्ठ! उस समय गांधार नरेश शकुनि के पास दस हजार घुड़सवारों की सेना थी, जो बड़े-बड़े भालों से युद्ध कर रही थी। उसे साथ लेकर वह उस नरसंहारपूर्ण युद्ध में पाण्डव सेना के पिछले भाग में गया और सब मिलकर उस सेना पर तीखे बाणों से प्रहार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  9.23.31-32 
अनीकं दशसाहस्रमश्वानां भरतर्षभ।
आसीद् गान्धारराजस्य विशालप्रासयोधिनाम्॥ ३१॥
बलेन तेन विक्रम्य वर्तमाने जनक्षये।
पृष्ठत: पाण्डवानीकमभ्यघ्नन्निशितै: शरै:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उस समय गांधार नरेश शकुनि के पास दस हजार घुड़सवारों की सेना थी, जो बड़े-बड़े भालों से युद्ध कर रही थी। उसे साथ लेकर वह उस नरसंहारपूर्ण युद्ध में पाण्डव सेना के पिछले भाग में गया और सब मिलकर उस सेना पर तीखे बाणों से प्रहार करने लगे।
 
O best of the Bharatas! At that time, Gandhara King Shakuni had an army of ten thousand horsemen who fought with huge spears. Taking him along with him, he went to the rear of the Pandava army in that massacre-prone war and all of them together started attacking that army with sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)