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mahabharat 9.23.28: इसी बीच भयंकर पाण्डव पुनः हमारे पास आ पहुंचे और हमें अपना लक्ष्य पाकर उन्होंने अपने धनुष चढ़ाने शुरू कर दिए तथा हम पर बाणों की वर्षा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  9.23.28 
अस्मांस्तु पुनरासाद्य लब्धलक्ष्या दुरासदा:।
शरासनानि धुन्वन्त: शरवर्षैरवाकिरन्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इसी बीच भयंकर पाण्डव पुनः हमारे पास आ पहुंचे और हमें अपना लक्ष्य पाकर उन्होंने अपने धनुष चढ़ाने शुरू कर दिए तथा हम पर बाणों की वर्षा करने लगे।
 
Meanwhile the fierce Pandavas again reached us and finding us as their target, they began swinging their bows and showering arrows upon us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)