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mahabharat 9.23.23-24h: चारों तरफ तेज़ हवाएँ चलने लगीं, रेत और कंकड़ बरसने लगे। हाथी चीखने और काँपने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  9.23.23-24h 
विष्वग्वाता: प्रादुरासन् नीचै: शर्करवर्षिण:॥ २३॥
अश्रूणि मुमुचुर्नागा वेपथुं चास्पृशन् भृशम्।
 
 
अनुवाद
चारों तरफ तेज़ हवाएँ चलने लगीं, रेत और कंकड़ बरसने लगे। हाथी चीखने और काँपने लगे।
 
Winds started blowing everywhere, showering sand and pebbles down. The elephants began to cry and tremble. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)