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mahabharat 9.23.22-23h: महाराज! पृथ्वी अपने पर्वतों और वनों सहित भयंकर ध्वनि से काँपने लगी और आकाश से छड़ों और जलती हुई लकड़ियों सहित अनेक उल्काएँ आकर सौरमण्डल से टकराकर सब दिशाओं में बिखर गईं।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  9.23.22-23h 
चचाल शब्दं कुर्वाणा सपर्वतवना मही।
सदण्डा: सोल्मुका राजन् कीर्यमाणा: समन्तत:॥ २२॥
उल्का पेतुर्दिवो भूमावाहत्य रविमण्डलम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! पृथ्वी अपने पर्वतों और वनों सहित भयंकर ध्वनि से काँपने लगी और आकाश से छड़ों और जलती हुई लकड़ियों सहित अनेक उल्काएँ आकर सौरमण्डल से टकराकर सब दिशाओं में बिखर गईं।
 
King! The earth along with its mountains and forests began to shake with a terrifying sound, and many meteors, including rods and burning logs, came from the sky, colliding with the solar system and scattered in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)