श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  9.22.49 
शब्दश्च तुमुल: संख्ये शराणां पततामभूत्।
महावेणुवनस्येव दह्यमानस्य पर्वते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जैसे पर्वत पर जलते हुए विशाल बाँसों के वन से उत्पन्न होने वाली चरचराहट की ध्वनि सुनाई देती है, वैसे ही युद्धभूमि में गिरते हुए बाणों की भयानक ध्वनि वहाँ गूँज रही थी ॥49॥
 
Just as the crackling sound emanating from a forest of huge bamboos burning on a mountain is heard, similarly the terrifying sound of arrows falling on the battlefield was resonating there. ॥49॥
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि संकुलयुद्धे द्वाविंशोऽध्याय:॥ २२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें संकुलयुद्धविषयक बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)