श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  9.22.45 
रजसा तेन सम्पृक्तो भास्करो निष्प्रभ: कृत:।
संछादिताभवद् भूमिस्ते च शूरा महारथा:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उस धूलके सम्पर्कसे सूर्यकी चमक लुप्त हो गई और पृथ्वी तथा वे महारथी भी उसमें समा गए ॥45॥
 
On coming in contact with that dust the Sun lost its shine and the Earth and those mighty warriors too were covered. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)