श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  9.22.43 
तेषां पत्रसमुद्भूतं रजस्तीव्रमदृश्यत।
वातेन चोद्धतं राजन् धावद्भिश्चाश्वसादिभि:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उनके वाहन, वायु और दौड़ते हुए घुड़सवारों द्वारा उड़ाई गई भयंकर धूल सर्वत्र दिखाई दे रही थी ॥ 43॥
 
O King! The dreadful dust raised by their vehicles, the wind and the running horsemen was visible everywhere. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)