श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  9.22.42 
ते समासाद्य समरे परस्परमरिंदमा:।
व्यनदंश्चैव जघ्नुश्च समासाद्य महाहवे॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वे सभी शत्रु-दमनकारी योद्धा उस महायुद्ध में प्रहार और गर्जना करते हुए रणभूमि में एक-दूसरे से भिड़ गये।
 
All those enemy-suppressing warriors clashed with each other in the battlefield, striking and roaring in that great war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)