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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.22.4 
यं यं हि समरे योधं प्रपश्यामि विशाम्पते।
स स बाणैश्चितोऽभूद् वै पुत्रेण तव भारत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! भरतनन्दन! युद्धस्थल में मैंने जिस भी योद्धा को देखा, वह आपके पुत्र के बाणों से छलनी हुआ प्रतीत हो रहा था।
 
Prajanath! Bharatanandan! Whichever warrior I saw in the battlefield, he appeared to be riddled with the arrows of your son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)