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mahabharat 9.22.38-39h: हे भरत! उनके और द्रौपदी के पुत्रों के बीच ऐसा विचित्र युद्ध आरम्भ हो गया, जैसे देहधारियों और उनकी इन्द्रियों के बीच युद्ध होता है, जो बार-बार उठकर विषयों की ओर मुड़ती हैं। ॥38 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  9.22.38-39h 
एवं चित्रमभूद् युद्धं तस्य तै: सह भारत॥ ३८॥
उत्थायोत्थाय हि यथा देहिनामिन्द्रियैर्विभो।
 
 
अनुवाद
हे भरत! उनके और द्रौपदी के पुत्रों के बीच ऐसा विचित्र युद्ध आरम्भ हो गया, जैसे देहधारियों और उनकी इन्द्रियों के बीच युद्ध होता है, जो बार-बार उठकर विषयों की ओर मुड़ती हैं। ॥38 1/2॥
 
O Bharata! Such a strange battle began between them and the sons of Draupadi, as is the battle between embodied beings and their senses, which repeatedly rise and turn towards objects. ॥ 38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)