Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.22.37-38h: जिस प्रकार इन्द्रियाँ मूर्ख मनुष्य को कष्ट देती हैं, उसी प्रकार वे पाँचों भाई कृपाचार्य को कष्ट देने लगे। कृपाचार्य भी अत्यन्त क्रोध में भरकर युद्धभूमि में उनसे युद्ध कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते च सम्पीडयामासुरिन्द्रियाणीव बालिशम्॥ ३७॥
स च तान् प्रति संरब्ध: प्रत्ययोधयदाहवे।
अनुवाद
जिस प्रकार इन्द्रियाँ मूर्ख मनुष्य को कष्ट देती हैं, उसी प्रकार वे पाँचों भाई कृपाचार्य को कष्ट देने लगे। कृपाचार्य भी अत्यन्त क्रोध में भरकर युद्धभूमि में उनसे युद्ध कर रहे थे।
Just as the senses torment a foolish man, in the same way those five brothers started tormenting Kripacharya. Kripacharya too was fighting with them in the battlefield, filled with great anger. 37 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥