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mahabharat 9.22.35-36h: दूसरी ओर, युद्धस्थल में कुपित हुए पराक्रमी कृपाचार्य ने मुड़ी हुई गांठों वाले अनेक बाणों से द्रौपदी के बलवान पुत्रों को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  9.22.35-36h 
गौतमस्तु रणे क्रुद्धो द्रौपदेयान् महाबलान्॥ ३५॥
विव्याध बहुभि: शूर: शरै: संनतपर्वभि:।
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर, युद्धस्थल में कुपित हुए पराक्रमी कृपाचार्य ने मुड़ी हुई गांठों वाले अनेक बाणों से द्रौपदी के बलवान पुत्रों को घायल कर दिया।
 
On the other hand, the valiant Kripacharya, enraged on the battlefield, wounded the mighty sons of Draupadi with many arrows having bent knots. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)