श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  9.22.34-35h 
तयोर्युद्धं महच्चासीत् संग्रामे भरतर्षभ॥ ३४॥
प्रभिन्नयोर्यथा सक्तं मत्तयोर्वरहस्तिनो:।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! रणभूमि में उन दोनों के बीच जो महान् युद्ध हो रहा था, वह ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो दो मदमस्त हाथी अपने मदरूपी अमृत से बहते हुए परस्पर युद्ध कर रहे हों।
 
O best of the Bharatas! The great battle between them on the battlefield looked as if two extremely inebriated elephants, flowing with their elixir of intoxication, were fighting with each other. 34 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)