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mahabharat 9.22.30-31h: वे दोनों वीर योद्धा कुलीन कुलों में जन्मे थे। अतः वे एक-दूसरे के आक्रमणों का प्रतिकार करने की इच्छा से युद्धभूमि में लड़ते देखे गए। 30 1/2   |   mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  9.22.30-31h 
तौ तत्र समरे वीरौ कुलपुत्रौ महारथौ॥ ३०॥
योधयन्तावपश्येतां कृतप्रतिकृतैषिणौ।
 
 
अनुवाद
वे दोनों वीर योद्धा कुलीन कुलों में जन्मे थे। अतः वे एक-दूसरे के आक्रमणों का प्रतिकार करने की इच्छा से युद्धभूमि में लड़ते देखे गए। 30 1/2
 
Both those valiant warriors were born in noble families. Therefore, they were seen fighting in the battlefield with the desire to counter each other's attacks. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)