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mahabharat 9.22.27-28h: तत्पश्चात् समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने बड़े जोर से गर्जना की, "हे महाराज! उनका वह युद्ध विचित्र, भयंकर, सिद्धों और चारणों से युक्त तथा दर्शकों के आनन्द को बढ़ाने वाला था।"   |   mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  9.22.27-28h 
ननाद च महानादं प्रवर: सर्वधन्विनाम्।
तद् युद्धमभवच्चित्रं घोररूपं च मारिष॥ २७॥
प्रेक्षतां प्रीतिजननं सिद्धचारणसेवितम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने बड़े जोर से गर्जना की, "हे महाराज! उनका वह युद्ध विचित्र, भयंकर, सिद्धों और चारणों से युक्त तथा दर्शकों के आनन्द को बढ़ाने वाला था।"
 
After this, Yudhishthira, the best among all archers, roared very loudly. O honourable Sir! That battle of theirs was strange, dreadful, served by Siddhas and Charanas and increased the joy of the spectators. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)