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mahabharat 9.22.26: तत्पश्चात् धर्मपुत्र युधिष्ठिर ने दूसरे रथ पर सवार होकर पुनः आक्रमण किया और शकुनि को पहले नौ बाणों से घायल किया तथा फिर पांच बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 22: दुर्योधनका पराक्रम और उभयपक्षकी सेनाओंका घोर संग्राम  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  9.22.26 
अथान्यं रथमास्थाय धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:।
शकुनिं नवभिर्विद्‍ध्वा पुनर्विव्याध पञ्चभि:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्मपुत्र युधिष्ठिर ने दूसरे रथ पर सवार होकर पुनः आक्रमण किया और शकुनि को पहले नौ बाणों से घायल किया तथा फिर पांच बाणों से घायल कर दिया।
 
Thereafter Yudhishthira, the son of Dharma, mounted on another chariot and attacked again, wounding Shakuni first with nine arrows and then piercing him with five arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)